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Text bookNCERT
Chapter NumberNumber 1 Summary of the Story
CategoriesSHORT STORIES Class 12th
2UP Board Syllabus SHORT STORIES 12th Chapter 2 Short Questions Answer
3UP Board Syllabus SHORT STORIES 12th Chapter 2 Long Questions Answer

Summary of the Story


Introduction: An Astrologer’s Day’ is an interesting story of a man who became an astrologer by chance. The astrologer was once an ordinary farmer. When he left
the village he never intended to be an astrologer. He was as much a stranger to the stars as were his customers. He went to the south. He settled in a town. He adopted
the he profession of an astrologer.

His appearance

His appearance : Heapplied sacred ash and vermilion on his fore-head. He had dark whiskers. He wound a saffron-coloured turban around his head. His personality suited his profession. People were attracted to him like bees.

His remarkable place

His remarkable place : The astrologer was very punctual in coming to the market. He opened his bag and spread out professional equipments which consisted of a dozen cowrie shells, a piece of cloth, a note book and a bundle of palmyra writing. He sat under the Tamarind tree. It was the remarkable place in many ways. Vendors came to sell their articles there in great number.

Analysis of troubles

Analysis of troubles : He had a knowledge of practical analysis regarding mankind’s troubles. These troubles were related to settle marriage cases, money matters and other problems of humanities. He had a long experience of under- standing the wrongs. He could easily guess the questions which his clients wanted to put before. He gazed at client’s palm and started answering his questions like


(1) In many ways you are not getting the fullest results for your efforts.
(2) Is there any woman in your family, may be even a distant relative, who is not well disposed towards you?
(3) Most of your troubles are due to your nature. How can you be otherwise with saturn where he is ? You have an impetous nature and a rough exterior.

A stranger came

A stranger came : One day a stranger happened to come to him. He had a glance over the stranger and thought him to be his client and said that he looked worried very much. The stranger asked him that he should reveal the truth regarding his questions put to him. The astrologer told him that he charged three pies a question. The stranger threw an anna to him told that the answer to his questions should be satisfactory. The astrologer told him that if the answers to the questions proved to be true and satisfactory, he should give him five rupees. The stranger did not agree. Eight annas as the charges were settled. The stranger agreed on the condition that if the astrologer proved to be wrong, he would have to pay just

Astrologer’s restlessness

Astrologer’s restlessness : The astrologer saw the face of the stranger in the light of the match stick. He became restless and refused to read his palm and returned his annaback and told that he was not used to such challenges. He made preparations to bundle up. The stranger help him by his wrist and threatened him that he could not go from there till he did not answer his questions. The astrologer told him that he would study his palm the next day but the stranger insisted. The astrologer agreed and accepted the challenge,

Stranger’s question

Stranger’s question: The stranger asked only one question that if he would be successful in his search made at present or not. The astrologer agreed to answer on the condition that he should pay him one rupee if the answer was correct. The stranger also agreed.

Astrologer’s reply

Astrologer’s reply : The stranger had been left for dead. Knife had passed through him once. He had been pushed into a well nearby in the field. He was left for dead.

Stranger told the astrologer that he should have been dead if some passerby had not chanced to peep into the well. He asked the astrologer when he would get
at his enemy. The astrologer replied that he had died four months back in a far off town. The astrologer told that his name was Guru Nayak and advised him that he
should take the next train to his village because there was again a danger into his life. The astrologer took out a pinch of sacred ash and advised him to rub it on his
forehead and go home and he should never travel southward again thus he would live for hundred years. Astrologer also told that his enemy had been crushed under a lorry. The stranger became happy to hear this. The stranger gave him a handful of coins.

Astrologer reached his home

Astrologer reached his home : The astrologer collected his articles and put hem into his bag. There was complete silence in the darkness. It was nearly mid-
cight when the astrologer reached home. His wife demanded explanation. He cave the coins given by the stranger. She counted the amount. It was twelve and a
half annas. His wife asked him why he was worried.


Conclusion: The astrologer told her that he lived in a village when he was ung. He led a carefree life. He drank, gambled and quarrelied like foolish youngsters. When he was gambling, he took a quarrel with a villager and attacked at him and left him for dead. He arrived in the city and married her but that day he felt that a great load was gone from him because he found the man alive. Only then he could enjoy his sleep well.

कहानी का सारांश


भूमिका-‘An Astrologer’s Day’ एक ऐसे व्यक्ति की दिलचस्प कहानी है जो भाग्य से एक ज्योतिषी बन गया । ज्योतिषी कभी एक साधारण किसान था। जब उसने गाँव छोड़ा तो कभी नहीं सोचा कि वह ज्योतिषी बनेगा। वह ग्रहों से उतना ही अपरिचित था जितने कि उसके ग्राहक । वह दक्षिण भारत
को चला गया। वह एक कस्बे में रहने लगा। उसने एक ज्योतिषी का व्यवसाय अपना लिया।

उसका व्यक्तित्व

उसका व्यक्तित्व-वह अपने माथे पर पवित्र राख और सिन्दूर लगाता था। उसकी मूंछे काली थीं। वह अपने सिर पर केसरियाँ रंग की पगड़ी बाँधता था। उसका व्यक्तित्व उसके व्यवसाय के अनुरूप था। लोग उसकी ओर मधुमक्खियों की तरह आकर्षित होते थे।

उसकी विशिष्ट जगह

उसकी विशिष्ट जगह-ज्योतिषी बाजार में आने में बहुत नियमित था। वह अपना थैला खोलता था और अपने व्यावसायिक सामान को फैलाता था जिसमें एक दर्जन कौड़ी शंख, एक कपड़े का टुकड़ा, एक कापी और लिखे हुए भोजपत्र का बण्डल सम्मिलित थे। वह इमली के पेड़ के नीचे बैठता था। यह कई तरह से महत्त्वपूर्ण स्थान था। बड़ी संख्या में फेरीवाले अपनी वस्तुएँ बेचने के लिए यहाँ आया करते कठिनाइयों का विश्लेषण-उसे मानवीय कष्टों से सम्बन्धित विश्लेषण की व्यावहारिक जानकारी थी। ये कठिनाइयाँ शादी तय होने से सम्बन्धित, धन सम्बन्धी मामलों तथा अन्य मानवीय कठिनाइयों से सम्बन्धित होते थे। उसे गलतियों को समझने का लम्बा अनुभव था। वह ग्राहकों द्वारा प्रस्तुत प्रश्नों का अनुमान बड़ी सरलता से लगा लिया करता था। वह ग्राहकों की हथेली पर नजर डालता था उसके प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार देना प्रारम्भ कर देता था।

(1) अनेक प्रकार से तुम अपने प्रयासों का सम्पूर्ण परिणाम प्राप्त नहीं कर रहे हो।
(2) क्या तुम्हारे परिवार में कोई महिला है, वह दूर की रिस्तेदार भी हो सकती है जो तुम्हारी और वक तरह सहायक और मैत्रीभाव नहीं रखती।
(3) तुम्हारी अधिकतर परेशानियाँ, तुम्हारे स्वभाव के कारण है। तुम शनि के विपरीत कैसे जा सकते हो जहाँ वह है? तुम्हारा स्वभाव संवेगात्मक है और बाह्य रूप से रूखापन है।

एक अजनवी आया

एक अजनवी आया-एक दिन एक अजनबी उसके पास आया। उसने अजनबी की तरफ एक मजर डाली और उसे अपना ग्राहक समझा और उसकी ओर देखकर कहा कि वह बहुत परेशान नजर आता है। अजनवी ने उससे कहा कि उसके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर सत्यता से स्पष्ट करे। ज्योतिषी न कहा कि प्रति प्रश्न वह तीन पाई लेता है। अजनवी ने उसकी ओर एक आना फेंका और कहा कि: उसके प्रश्नों के उत्तर से वह (अजनबी) सन्तुष्ट होना चाहिए। ज्योतिषी ने कहा कि यदि वह उसके उत्तरी
से सन्तुष्ट होगा व सत्यता होगी तो पाँच रुपये देने होंगे। अजनबी इस पर सहमत नहीं हुआ। फीस के वार पर आठ आना तय हो गए। अजनबी इस शर्त पर सहमत हो गया कि उसके द्वारा बताये उत्तर यदि गलत हुए तो उसे दोगुना धन लौटाना पड़ेगा।

ज्योतिषी की बेचैनी

ज्योतिषी की बेचैनी-ज्योतिषी ने अजनबी का चेहरा माचिस की रोशनी में देखा। वह बेचैन हो गया और उसका भविष्य बताने से मना कर दिया और उसका आना वापस कर दिया और कहा कि वह इस प्रकार की चुनौती का आदी नहीं है। उसने सामान बाँधने की तैयारी की। अजनबी ने उसकी कलाई
पकड़ ली और धमकी दी कि वह उसके प्रश्नों के उत्तर दिये बिना नहीं जा सकता। ज्योतिषी ने कहा कि वह उसके प्रश्नों के उत्तर अगले दिन देगा लेकिन अजनबी ने जोर डाला। ज्योतिषी सहमत हो गया और चुनौती को स्वीकार कर लिया।

अजनबी का प्रश्न

अजनबी का प्रश्न-अजनबी ने केवल एक प्रश्न पूछा कि क्या उसे इस समय की जाने वाली खोजवीन में सफलता मिलेगी या नहीं। ज्योतिषी इस शर्त पर उत्तर देने को तैयार हुआ कि वह उसे एक रुपया देगा, यदि उसका उत्तर सही है। अजनबी भी सहमत हो गया।

ज्योतिषी का उत्तर

ज्योतिषी का उत्तर-अजनबी को मरा समझकर छोड़ दिया था। एक बार तो चाकू से प्रहार किया गया था। उसे खेत के पास कुएँ में धकेल दिया गया था। उसे मरा समझकर छोड़ दिया गया था। अजनबी ने बताया कि यदि वहाँ से गुजरने वाले एक व्यक्ति ने कुएँ में झाँककर न देखा होता तो वह मर
हो गया होता। उसने ज्योतिषी से पूछा कि वह अपने दुश्मन को कब तक प्राप्त कर लेगा। ज्योतिषी ने उत्तर दिया कि उसका नाम गुरु नायक था और उसे सलाह दी कि वह अपने गाँव जाने के लिए अगली गाड़ी पकड़ ले क्योंकि उसके जीवन में फिर खतरा आने वाला है। ज्योतिषी ने पवित्र राख की एक पुड़िया निकाली और उसे अपने माथे पर लगाने की सलाह दी और घर जाने को कहा और फिर कभी दक्षिण दिशा की ओर यात्रा न करे, इस प्रकार वह सौ वर्ष तक जीवित रहेगा। ज्योतिषी ने यह भी कहा कि
उसका शत्रु एक लारी के नीचे कुचल कर मर गया है। अजनबी यह सुनकर प्रसन्न हुआ। अजनबी ने उसे मुट्ठी भर सिक्के दिए।

ज्योतिषी अपने घर पहुँचा

ज्योतिषी अपने घर पहुँचा-ज्योतिषी ने अपना सामान समेटा और एक थैले में रखा। अन्धकार में – पूर्ण शान्ति थी। जब ज्योतिषी घर पहुँचा लगभग आधी रात हो गई थी। उसकी पत्नी ने इसका कारण पूछा। उसने अजनबी द्वारा दिए सिक्के उसे दिए उसने पैसों को गिना। वे साढ़े बारह आना थे। उसकी
पली ने उससे पूछा कि वह परेशान क्यों है।


निष्कर्ष-ज्योतिषी ने उससे कहा कि जब वह युवक था, एक गाँव में रहता था। वह चिन्तारहित जीवन व्यतीत करता था। वह शराब पीता था, जुआ खेलता था और मूर्ख युवकों की तरह झगझ करता था। जब वह जुआ खेल रहा था तो उसने एक ग्रामीण के साथ झगड़ा कर लिया और उस पर आक्रमण कर दिया और उसे मरा हुआ जानकर छोड़ दिया। वह शहर आ गया और उससे शादी कर ली लेकिन उस दिन उसने अनुभव किया कि उस पर से भारी बोझ उतर गया है क्योंकि उसने उस आदमी को जीवित देखा। तभी वह नींद का पूरा आनन्द ले सका।

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