UP Board Syllabus SHORT STORIES THE GOLD WATCH
UP Board Syllabus SHORT STORIES 12th Chapter 3 Long Questions Answer
BoardUP Board
Text bookNCERT
Class12th
SubjectEnglish
Chapter3
Chapter name THE LOST CHILD
Chapter NumberNumber 3 Long Questions Answer
CategoriesSHORT STORIES Class 12th
UP BOARD SYLLABLES SHORT STORIES THE LOST CHILD Chapter List
NumberChapter
1UP Board Syllabus SHORT STORIES THE LOST CHILD
2UP Board Syllabus SHORT STORIES 12th Chapter 3 Short Questions Answer
3UP Board Syllabus SHORT STORIES 12th Chapter 3 Long Questions Answer

Q.1 Give the critical appreciation of the story ‘The Lost Child’.
V”The Lost Child’ कहानी का दोषदर्शी मूल्याकन कीजिए।

Or

What makes you like the story “The Lost Child’ ?
‘The Lost Child’ कहानी को तुम क्यों पसन्द करते हो? .

Ans. Introduction: The story ‘The Lost Child describes the Child psychology tha very touching manner. I like the story very much. It has the following qualities:

Beautiful narration: The language ofthe story is very simple. Its style is plain. The description in the story is very beautiful. Child psychology appeals most to
everyone who tries to read it. Everything in this world fills his heart with pleasure and attraction while he is with his parents. But the attraction,and appreciation for
those things runs away when he finds himself lost.

The pathos in the story : The whole story is full of pathos. From the very beginning, we feel that the desires of the child are not fulfilled. Every time his question for having any article, is neglected and his parents deny to have anything. The result is that the child feels suppressed.

Pathetic atmosphere in the story: When the child is lost in the fair. ppailers are pathetic while reading the psychological statements made by the child. The writer
has described the scene beautifullly and is fully successful in creating sympathy with child in the hearts of the readers. The scene becomes very pathetic when he traces his parents in the fair.

Beauty of nature in the story: The au hor has been very successful in describ- ing the beauty of the nature in the story. He has described the scene of fair very beautifully. The narration of rural atmosphere is very much near reality.

Aim of the story: The story teaches us that we should not neglect a child and his demands. We should try to fulfil his requirements. Negligence of parents disconsolates and disappoints the child. .

Conclusion: The theme of the story is related to the psychology of a child. The story depicts about the changing behaviour of the child in the changing situations.

प्रस्तावना-‘The Lost Child’ कहानी बाल मनोविज्ञान को मार्मिक ढंग से वर्णन करती है। मुझे कहानी बहुत पसन्द है। इसमें निम्न विशेषताएँ हैं–

सुन्दर कथन-कहानी की भाषा बहुत सरल है। इसकी शैली सामान्य है। कहानी का कथ्य बहुत . सुन्दर है। जो भी इसे पढ़ता है उसे बाल मनोविज्ञान बहुत पसन्द आता है। संसार की प्रत्येक वस्तु जो सुन्दर और अजनबी है, उसे अपने माता-पिता के साथ आनन्द देती है और आकर्षित करती है। परन्तु
जब वह अपने माता-पिता से बिछुड़ जाता है तो वे सभी वस्तुएँ उसे अच्छी नहीं लगतीं।

कहानी में संवेग-पूरी कहानी संवेगात्मक है। प्रारम्भ से ही हम देखते हैं कि बच्चे की इच्छाएँ परी नहीं होती है। हर बार उसकी किसी भी वस्त की इच्छा को नकार दिया जाता है और उसके माता-पिता हर चीज को लेने से मना कर देते हैं। परिणामस्वरूप बच्चा अपने को दबा हुआ महसूस करता है।

कहानी का संवेगात्मक वातावरण–जब बालक मेले में खो जाता है तो पाठक भावुक हो जाते हैं जब बालक द्वारा मनोवैज्ञानिक कथन प्रस्तुत किया जाता है। लेखक ने उस दृश्य का सुन्दरता से वर्णन किया है और पाठकों के दिल में पूरी सहानुभूति पैदा करने में सफल रहा है। जब बच्चा मेले में अपने
माता-पिता को खोजता है तो वह दृश्यं बहुत संवेगात्मक हो जाता है।

कहानी में प्राकृतिक सुन्दरता-कहानी में सुन्दरता का वर्णन करने में लेखक पूरी तरह सफल रहा है। उसने मेले के दृश्य का बहुत सुन्दरता से वर्णन किया है। ग्रामीण वातावरण का वर्णन वास्तविकता के काफी समीप है।

कहानी का उद्देश्य-कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें बच्चे का तिरस्कार नहीं करना चाहिए और उसकी आवश्यकताओं को तुकराना नहीं चाहिए। हमें उसकी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहिए। माता-पिता द्वारा बच्चे का तिरस्कार उसे निराशा और असन्तोष से युक्त बना देता है।

उपसंहार-कहानी की पृष्ठभूमि बाल मनोविज्ञान से सम्बन्धित है। कहानी परिवर्तित स्थितियों में बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन लाती है। :

Q.2. What was the plight of the child after he had lost his parents at the fair?
जब बच्चे ने मेले में अपने माता-पिता को खो दिया तो उसकी क्या हालत हुई?

Ans. Introduction: The story, ‘The Lost Child’ is based on the theme of child psychology. A little boy goes to the fair in the company of his parents. After some time the child is lost in the fair. The plight of the child, after he had lost his parents, was that he felt great dejection. He tried to trace them but in vain.

His Condition : The child had lost his parents. He was crying regularly. His throat was fully dry. He felt a sudden jerk of his body. He ran away from the place where he was standing. He was very sad and cried “Mother! Father!” His eyes were filled with tears. He began to run here and there. He did not know which direction
he should go. His cry changed in sobbing. His yellow turban came untied. His clothes were wet with perspiration. Dust and sweat were mixed with his body.

Conclusion: The child tried his best to find out his lost parents. The child struggled hard to make a search of his parents who had lost in the crowdy fair. The child was disappointed. He took no interest in anything or article of the fair. He only wanted the company of his parents.

प्रस्तावना-“The Lost Child’ कहानी बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। एक छोटा बालक अपने माता-पिता के साथ मेला देखने जाता है। कुछ समय बाद बालक मेरु में खो जाता है। अपने माता-पिता से बिछुड़ने के बाद बालक की स्थिति निराशापूर्ण हो जाती है। उसने उन्हें खोजने का प्रयास किया परन्तु
सब व्यर्थ रहा।

उसकी हालत-बच्चे के माता-पिता बिछुड़ चुके थे। वह लगातार रो रहा था। उसका गला पूरी तरह शुष्क हो गया। उसे अचानक शारीरिक झटका लगा। वह जहाँ खड़ा था वहाँ से भाग गया। वह बहुत उदास था और ‘माँ। पिताजीकहकर चिल्ला रहा था। उसकी आँखों में आँसू थे। वह इधर-उधर दौड़ने लगा। उसे ज्ञात नहीं था कि वह किस दिशा में जाए। उसका रोना सुबकने में बदल गया। उसकी पीली पगड़ी ढीली पड़ गई। उसके कपड़े पसीने से भीग गए। धूल और पसीना उसके शरीर में समाहित हो गए।

उपसंहार-बच्चे ने अपने गुम हुए माता-पिता को खोजने का भरसक प्रयास किया। भीड़ भरे मेले में गुम हुए माता-पिता की तलाश में उसने कड़ा संघर्ष किया। बच्या निराश हो गया। उसने मेले की किसी भी चीज में कोई रुचि नहीं दिखाई। वह केवल अपने माता-पिता का साथ चाहता था।

Q.3. Show how the child lost all interest in the fair after he got separated from his parents ?
अपने माता-पिता से बिछुड़ने के पश्चात् बच्चे ने मेले के प्रति रूचि को कैसे खो दिया. प्रदर्शित कीजिए।

Or

What changes do you notice in the behaviour of the child once he is seperated from his parents in the story “The Lost Child’
‘The Lost Child’ कहानी में जब बच्चा अपने माता-पिता से बिछुड़ जाता है तो आप बच्चे में क्या परिवर्तन देखते है?

Ans. Introduction: The story. “The Lost Child’ is one of the most famous and interesting short stories written by Mulk Raj Anand. In this story the author depicts
the psychology of a child when he got separated from his parents. A child by nature Is very curious about the things around him. He sees and wants to possess them.
Every thing in the fair attracts him when he is in the company of his parents.

His attraction dies: The little child in the fair feels happy with his parents. When he had lost his parents his attraction for everything died away. A gentleman took the child in his arms. He tried to please the child. He asked him his address. He was separated from his parents. He only said to him that he wanted his mother

and father. The child lost all interest in the fair. Nothing could attract him. He only cried and wept.

, conclusion : The gentleman took him to every place. He asked him from where he came and whose child he was. He carried him to the round about, to the juggler, to the balloon seller and to the shop of a sweet seller. But now he wanted only his parents. He lost his all interest in the fair.

प्रस्तावना-“The Lost Child’ कहानी मुल्कराज आनन्द द्वारा लिखित कहानियों में से एक अति लोकप्रिय और रोचक कहानी है। प्रस्तुत कहानी में लेखक अपने माता-पिता से बिछुड़ने के बाद एक पालक के मनोविज्ञान का चित्रण करता है। एक बालक स्वभावगत रूप से अपने आस-पास की वस्तुओं के प्रति जिज्ञासु होता है। वह उन्हें देखना और प्राप्त करना चाहता है। जब वह अपने माता-पिता के साथ मेले में है तो मेले की प्रत्येक वस्तु उसे आकर्षित करती है।

उसका आकर्षण समाप्त हो जाता है-छोटा बालक अपने माता-पिता के साथ मेले में प्रसन्नता की अनुभूति करता है। जब वह अपने माता-पिता से बिछुड़ गया तो उसका प्रत्येक वस्तु के प्रति आकर्षण समाप्त हो गया। एक सज्जन व्यक्ति ने बच्चे को अपनी बाँहों में उठा लिया। उसने बच्चे को खुश करने
का प्रयास किया। उसने उससे उसका पता पूछा। वह अपने माता-पिता से अलग हो गया था। उसने केवल यही कहा कि वह अपने माता-पिता से मिलना चाहता है। बच्चे का मेले के प्रति पूरा आकर्षण समाप्त हो गया। उसे कोई वस्तु आकर्षित नहीं कर पाई। वह केवल चिल्लाता और रोता रहा।

उपसंहार-सज्जन व्यक्ति उसे हर जगह ले गया। उसने बच्चे से पूछा कि वह कहाँ से आया है और उसके माता-पिता कौन हैं। वह उसे झूले पर, सपेरे के पास, गुध्यारे वाले तथा मिठाई वाले की दुकान पर ले गया। परन्तु अब उसे केवल अपने माता-पिता से मिलने की चाह थी। उसने मेले के प्रति
पूरे आकर्षण को भुला दिया।

Q. 4. What were the things that the child wanted to have ?
बच्चा किन चीजों को प्राप्त करना चाहता था?

Or

What things attracted the child and he wanted to possess ?
बच्चे को किन चीजों ने आकर्षित किया और उन्हें प्राप्त करना चाहता था?

Ans. In the story ‘The Lost Child’, Mulk Raj Anand, has beautifully described the condition of a child after he had lost the company of his parents. It was the day
of the spring fair outside the city. People were going to the fair. A little boy was also going to the fair with his parents. The child saw many things while going to the fair.

In the fair the child demanded for many things. The parents were near a sweemeat shop. The child demanded burfi to eat but his parents did not ailow him to have that. The child demanded a garland. He knew his father’s nature so he did not repeat it. Then the child saw balloons on sale. But he suppressed his demand. A juggler was showing a snake. The music of the juggler’s flute charmed the child but he dared not stopping there because he knew his father well. There was a round about in full swing. The child enjoyed its sight. He demanded a ride on it but there was no reply. His parents were not there. He was a lost child.

“The Lost Child’ कहानी में मुल्कराज आनन्द ने एक छोटे बच्चे के माता-पिता से घिरने के बाद की हालत का सुन्दरतापूर्वक वर्णन किया है। शहर से बाहर वसन्त के मेले का समय था। लोग मेले को जा रहे थे। एक छटा बालक भी अपने माता-पिता के साथ मेले को जा रहा था। मेले को जाते समय बालक ने अनेक वस्तुएँ देखी।

मेले में बालक ने कई चीजों की लेने की इच्छा की। माता-पिता एक मिठाई विक्रेता की दुकान के पास थे। बालक ने बर्फी खाने की इच्छा की लेकिन उसके माता-पिता ने उसे बर्फी नहीं दिलवाई। बच्चे ने एक माला की मांग की। वह अपने पिता के स्वभाव को जानता था अतः अपनी मांग को दुहराया नहीं। फिर बालक ने गुब्बारे बिकते देखे। लेकिन उसने अपनी इच्छा को क्या दिया। एक सपेरा साँप विखा रहा
था। सपेरे की बीन के संगीत ने बालक को आनन्वित किया लेकिन वह वहाँ ठहरा नहीं क्योंकि वह अपने पिता को अच्छी तरह जानता था। एक झूला तेज गति से चल रहा था। बालक ने उसे देखकर आनन्द लिया। उसने उस पर चढ़ने की इच्छा प्रकट की लेकिन उसे कोई उत्तर नहीं मिला। उसके माता-पिता . वहाँ नहीं थे। वह एक खोया हुआ बच्चा था।

Q.5. Sketch the character of the child as depicted in the story “The Lost Child’.
“The Lost Child’ कहानी में वर्णित बच्चे का चरित्र-चित्रण करो।

Or

Describe the psychology of childhood as it is presented in the story “The Lost Child’
‘The Lost Child’ कहानी में बच्चे का जो मनोविज्ञान प्रस्तुत किया गया है उसका वर्णन करो।

Ans. Introduction : The child psychology has been very clearly described in. the story “The Lost Child’. It is the nature of a child that he is very much curious
always towards the things which are new to his knowledge. He wants to know more and more and also desires to possess them all. He desires for every beautiful and strange thing.

An incident behind child psychology: This psychology of the child has been described through an incident. A spring festival held in a village. A great number of
people were drawn to it. There was a small child who walked along with his par- ents. He was full of joy. He stopped usually on the way to see the beautiful things.
They were strange to him. A sweetmeat seller sold sweets. The child wanted to have sweet. He saw flower garlands and balloons also. He wanted to have them
also. He wanted to enjoy the juggler’s tacts and tricks. Lastly, he wished to enjoy a roundabout. His parents never paid attention towards the things which their child
desired. He was filled with disappointment and felt disconsolated

Child was lost: Near a roundabout his parents lost. There was no sign of them, He traced them in all sides. He started crying and called his parents. A gentleman
took him up in his arms and asked him how he had got there and whose child he was. The child gave no reply. He simply said “I want my mother! I want my father.”

प्रस्तावना-बाल मनोविज्ञान का वर्णन ‘The Lost Child कहानी में स्पष्ट रूप से किया गया है। बच्चे का एक स्वभाव होता है कि वह सदैव उन चीजों की ओर बहुत अधिक आकर्षित होता है जो उसकी जानकारी के लिए नई होती है। वह अधिक से अधिक जानकारी चाहता है और उसे प्राप्त करने की
चिन्ता भी करता है। वह प्रत्येक सुन्दर और अपरिचित वस्तु की इच्छा करता है।

बाल मनोविज्ञान के पीछे एक घटना-बाल मनोविज्ञान का वर्णन एक घटना के माध्यम से किया गया है। एक गाँव में वसन्स का मेला लगा था। इसमें बहुत से लोग इकट्ठे हुए थे। एक छोटा बालक अपने माँ-बाप के साथ चल रहा था। वह बहुत प्रसन्न था। वह रारते में सुन्दर चीजों को देखने के लिए अक्सर बार जाता था। वे चीजें उसके लिए अपरिचित थीं! एक हलवाई मिठाई बेच रहा था। बच्चा मिठाई लेना चाहता था। उसने फूलों की माला और गुब्यारे भी देखे। वह उन्हें भी लेना चाहता था। वह सपेरे की
चालाकी का आनन्द भी लेना चाहता था। वह झूले का मा आनन्द लेना चाहता था। उसके माता-पिता के गले की चाहत की चीजों की और कोई ध्यान नहीं दिया। वह निराशा से भर गया और असन्तुष्ट हो गया।

बच्चा खो गया-एक मूल के पास उसके माता-पिता बिछुड़ गए। उनका कहीं नामोनिशान नहीं उसने उन्हें सब तरफ देखा। उसने रोना शुरू कर दिया और अपने माता-पिता को पकारने लगा। एक सज्जन व्यक्ति ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया आर उससे पूछा कि वह वहाँ कैसे आया और वह -किसका बेटा था| बच्चे ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने कवल इतना कहा “मैं अपनी माँ चाहता। मैं अपना पिला चाहता हूँ .

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